| گر حدوث است ور قِدَم ماییم |
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بیکم و کیف، کیف و کم ماییم |
| فرصتِ عشرتیم و نعمتِ وصل |
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آنچه گویند مغتنم، ماییم |
| محفلِ اعتبارِ امکان را |
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گر نشاط است و گر الم ماییم |
| گر دل آسود، راحت از ما داشت |
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ور طبیعت رَمید، رم ماییم |
| خاک، پهن است لیک ما فرشیم |
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چرخ دارد خَمی و خَم ماییم |
| سازِ آفاق، جمله خاموشیست |
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اینقدَر شورِ زیر و بم ماییم |
| غیبْ عرضِ شهادت است اینجا |
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هستیِ ظاهر از عدم ماییم |
| گردشِ رنگ، پُر به سامان است |
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هرکه از خود رَوَد، قَدَم ماییم |
| گر نفَس پر زنَد، تپش از ماست |
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ور دلی خون شود، ستم ماییم |
| بحرِ امکانِ انفعالِ ظهور |
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عرقی کرده است و نم ماییم |
| سرنوشتِ رموزِ هردو جهان |
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گر کسی میکند رقم، ماییم |
| لوحِ دل را که ما و من رقم است |
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ای ز ما بیخبر! قلم ماییم |
| به خَمّارِ خیالْ دور مرو |
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جامِ معنی دل است و جَم ماییم |
| مدعا عیش و عیش غیری نیست |
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احتراز از غم است و غم ماییم |
| صلح کرده است زندگی به فنا |
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تا به حکم یقین، حَکَم ماییم |
| ابرِ تحقیق فیض میبارد |
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عالمی سایل و کرم ماییم |
| عشق اگر پایی و سری دارد |
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به سراپای خود قسم، ماییم |
| عقل و حس، چشم و گوش، جان و جسد |
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همه عشق است، متّهم ماییم |
| جمعِ ما فرد و فردِ ما جمع است |
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هرکجا بشنوی منم، ماییم |
| گرچه وهم و گمان بیانیِ ماست |
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صاحب این کلام هم ماییم |